पटना में कच्ची दरगाह और वैशाली जिले के बिदुपुर के बीच गंगा नदी पर बने 9.75 किलोमीटर लंबे सिक्स लेन ब्रिज पर आधिकारिक उद्घाटन से पहले ही वाहनों का परिचालन शुरू हो गया है। यद्यपि पुल का औपचारिक लोकार्पण होना अभी बाकी है, लेकिन प्रशासन और निर्माण एजेंसी ने यातायात आवागमन की अनुमति दे दी है, जिसके चलते कार, बस, ट्रक, ऑटो और दोपहिया वाहन इस पुल पर चलने लगे हैं। बरसात के मौसम में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ की स्थिति के बीच यह पुल उत्तर और दक्षिण बिहार के साथ-साथ राघोपुर दियारा के निवासियों के लिए एक प्रमुख जीवनरेखा साबित हो रहा है।

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की सहायता से बिहार सरकार द्वारा लगभग 5,000 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना का निर्माण कराया गया है। एप्रोच रोड सहित इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 20 किलोमीटर (करीब 19.5 किलोमीटर) है, जिसमें गंगा नदी के ऊपर मुख्य एक्स्ट्राडोज्ड केबल ब्रिज 9.75 किलोमीटर लंबा है और लगभग 10 किलोमीटर का एप्रोच रोड शामिल है। इस परियोजना का निर्माण बिहार राज्य पथ विकास निगम (बिहार रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) की देखरेख में लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और दक्षिण कोरिया की देवू कंपनी के संयुक्त उपक्रम ने किया है।

तकनीकी विशेषताओं की बात करें तो इस गंगा ब्रिज में कुल 66 पिलर बनाए गए हैं, जहां एक पिलर से दूसरे पिलर के बीच की दूरी लगभग 150 मीटर रखी गई है। प्रत्येक पिलर के दोनों ओर 75-75 मीटर का स्पैन बना है और हर 450 मीटर की दूरी पर एक एक्सपेंशन जॉइंट दिया गया है। सुपरस्ट्रक्चर को सहारा देने के लिए 22.5 मीटर ऊंचे प्रत्येक पायलोन पर दोनों तरफ सात-सात, यानी कुल 14 स्टे केबल लगाए गए हैं। लगभग 32.5 मीटर (करीब 106 फीट) चौड़े इस डेक पर दोनों तरफ तीन-तीन लेन की सड़कें, डिवाइडर, साइड बैरियर और पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ बनाए गए हैं। इस ब्रिज पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा निर्धारित की गई है, जिससे गंगा नदी के इस पार से उस पार की दूरी लगभग 6 से 8 मिनट में तय की जा सकती है।

इस पुल के चालू होने से वैशाली जिले के राघोपुर दियारा क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले बाढ़ और बरसात के दौरान मुख्य रूप से नावों के सहारे सफर करना पड़ता था। स्थानीय यात्रियों के अनुसार अब पटना पहुंचना बेहद आसान हो गया है। वहीं उत्तर बिहार और समस्तीपुर की ओर से आने वाले वाहनों को पहले हाजीपुर, पासवान चौक और महात्मा गांधी सेतु पर भारी जाम का सामना करना पड़ता था। नए पुल से गुजरने वाले वाहन चालकों और ट्रक ड्राइवरों ने बताया कि इससे यात्रा के समय में कम से कम दो से तीन घंटे की बचत हो रही है, जिससे ईंधन और समय की भारी बचत हो रही है।

ब्रिज के आखिरी छोर पर फास्टैग आधारित लेन वाला आधुनिक टोल प्लाजा, प्रशासनिक भवन और एक आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्र बनाया जा रहा है, ताकि किसी दुर्घटना की स्थिति में लोगों को तत्काल उपचार मिल सके। वहीं पटना की ओर कच्ची दरगाह इंटरचेंज के चूड़ीनुमा गोल चक्कर के ठीक बीच में देश का पहला ब्रिज म्यूजियम तैयार किया जा रहा है, जहां 3D प्रोजेक्शन के जरिए पुल के डिजाइन और निर्माण की तकनीक को प्रदर्शित किया जाएगा। वीडियो के मुताबिक यह ब्रिज एनएच 31 से जुड़ते हुए आगे समस्तीपुर, आमस-दरभंगा मार्ग और पटना रिंग रोड को सीधी कनेक्टिविटी देगा, जिससे राजधानी पटना के आसपास भविष्य में गंगा नदी पर कुल 28 लेन की कनेक्टिविटी का मार्ग प्रशस्त होगा।