भारतीय रेलवे के इंजीनियरिंग इतिहास में आज एक ऐतिहासिक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) और सार्वजनिक उपक्रम IRCON इंटरनेशनल द्वारा महत्वाकांक्षी सिवोक-रंगपो रेल लिंक परियोजना के अंतर्गत बनाई जा रही टनल संख्या 8 का सफलतापूर्वक अंतिम ब्रेकथ्रू पूरा कर लिया गया है।
भूगर्भीय चुनौतियों पर विजय
सिक्किम को पहली बार ब्रॉड-गेज भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली यह रेल लाइन हिमालय की युवा व नाजुक शिवालिक पर्वतमाला से होकर गुजरती है। टनल संख्या 8 की कुल लंबाई लगभग 5,300 मीटर है, जो इस परियोजना की सबसे लंबी और सबसे जटिल सुरंग है। अत्यधिक जल रिसाव और कमजोर चट्टानी परतों के बावजूद न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) तकनीक का उपयोग करते हुए इंजीनियरों ने शून्य दुर्घटना दर के साथ यह मील का पत्थर हासिल किया।
"यह केवल एक सुरंग की खुदाई नहीं, बल्कि सुदूर पूर्वोत्तर सीमांत क्षेत्रों को राष्ट्र की मुख्य विकास धारा से अटूट रूप से जोड़ने का सशक्त प्रमाण है।" — मुख्य परियोजना प्रबंधक
सामरिक व सामाजिक महत्व
इस परियोजना के पूर्ण होने से पश्चिम बंगाल के सिवोक से सिक्किम की राजधानी गंगटोक के निकट रंगपो तक यात्रा का समय 5 घंटे से घटकर मात्र 1.5 घंटे रह जाएगा। साथ ही, यह भारी वर्षा और भूस्खलन के दौरान भी सभी मौसमों में खुली रहने वाली जीवनरेखा साबित होगी।


सामुदायिक चर्चा2
पाठकों की टिप्पणियाँWay4U की ग्राउंड रिपोर्टिंग वाकई काबिले तारीफ है। आप लोगों के वीडियोज यूट्यूब पर हमेशा सबसे पहले और सटीक होते हैं। वेबसाइट पर भी यह विस्तृत डेटा देखकर बहुत खुशी हुई!
सिक्किम के लिए यह बहुत बड़ी सौगात है! IRCON के इंजीनियर्स को बहुत बहुत बधाई। सिवोक रंगपो लाइन से सेना और आम जनता दोनों को बहुत राहत मिलेगी।