बिहार स्थित रेल कारखाने में एशिया के सबसे शक्तिशाली इलेक्ट्रिक रेल लोकोमोटिव डब्ल्यूएजी-12 (WAG-12) के निर्माण में महिला इंजीनियर अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। कारखाने में अब तक 600 लोकोमोटिव का निर्माण पूरा किया जा चुका है और आगे अन्य इंजनों का निर्माण जारी है। यह भारी रेल इंजन न केवल मालगाड़ियों की ढुलाई क्षमता बढ़ा रहे हैं बल्कि शून्य प्रदूषण के साथ पर्यावरण-अनुकूल और संधारणीय विकास को भी गति दे रहे हैं。

कारखाने में कार्यरत प्रोसेस इंजीनियर अंकिता कुमारी ने बताया कि उन्होंने बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक और एनआईटी पटना से एमटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद यहां काम शुरू किया था। शुरुआत में भारी उद्योग और ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण महिलाओं के काम करने को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई गई थीं। हालांकि, चुनौतियों को पार करते हुए उन्होंने यहां 600 रेल इंजनों के निर्माण कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई है।

वीडियो के अनुसार, अंकिता कुमारी ने बतौर प्रोसेस इंजीनियर स्वयं लोको निर्माण की बारीक तकनीक सीखने के बाद अब नालंदा में स्थित स्पेशल प्रोसेस ट्रेनिंग स्कूल की जिम्मेदारी भी संभाल रखी हैं। वह अन्य कर्मियों और तकनीकी विशेषज्ञों को डब्ल्यूएजी-12 रेल इंजन बनाने और जोड़ने का विशेष प्रशिक्षण दे रही हैं। प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा गुणवत्तापूर्ण निर्माण और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है।

इंजीनियर के मुताबिक, यह इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव पूरी तरह इको-फ्रेंडली है और संचालन के दौरान किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलाता। ट्रैक पर 600 रेल इंजनों को सफलतापूर्वक दौड़ते देखना किसी बड़े शहर की डेस्क जॉब की तुलना में कहीं अधिक संतुष्टि देता है। उनके अनुसार यह केवल मालगाड़ी के डिब्बों को खींचना नहीं है, बल्कि देश के आर्थिक विकास और औद्योगिक प्रगति को आगे ले जाने का जरिया है।