रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बेंगलुरु रेलवे स्टेशन से बेंगलुरु–मुंबई स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह देश की तीसरी स्लीपर वंदे भारत ट्रेन है, जो कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु को महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से जोड़ती है। यह ट्रेन दोनों प्रमुख शहरों के बीच एक ओवरनाइट सेवा के रूप में संचालित होगी। यह रात में अपने शुरुआती स्टेशन से चलेगी और अगली सुबह अपने गंतव्य पर पहुंचेगी, जिससे दोनों दिशाओं में यात्रा करने वाले यात्रियों को रात का सुविधाजनक सफर मिलेगा।
इस नई स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस में कुल 16 कोच लगाए गए हैं। कोच संरचना के तहत इसमें 11 कोच थर्ड एसी, 4 कोच सेकंड एसी और 1 कोच फर्स्ट एसी का शामिल किया गया है। इस पूरी ट्रेन में लगभग 823 यात्री एक साथ सफर कर सकते हैं। ट्रेन के संचालन से बेंगलुरु और मुंबई के बीच यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों और कारोबारियों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। अब तक हवाई यात्रा पर निर्भर या महंगी टिकटों से परेशान रहने वाले यात्री अब रात भर में अपना सफर पूरा कर सकेंगे।
रेलवे द्वारा बेंगलुरु और मुंबई के बीच तीनों श्रेणियों के लिए किराया भी तय कर दिया गया है। थर्ड एसी में सफर करने के लिए यात्रियों को प्रति टिकट 2,810 रुपये का भुगतान करना होगा। सेकंड एसी श्रेणी के लिए टिकट दर 3,630 रुपये रखी गई है, जबकि फर्स्ट एसी में यात्रा करने के लिए यात्रियों को 4,450 रुपये का टिकट लेना होगा। यात्री अपनी पसंद और बजट के अनुसार इन श्रेणियों में यात्रा कर सकते हैं।
ट्रेन में यात्रियों की सुविधा, आराम और स्वच्छता के आधुनिक इंतजाम किए गए हैं। कोचों में आरामदायक सीटें और बर्थ, आधुनिक वॉशरूम तथा बड़े आकार की खिड़कियां दी गई हैं, जिससे यात्री बाहर के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। सफर के दौरान यात्रियों को विशेष वेज थाली परोसी जा रही है, जिसमें चपाती, पूरी, जीरा राइस, पनीर की सब्जी, दाल फ्राई, पकौड़ा और दही शामिल है। इस भोजन पैकेट पर मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया और ताज होटल के साथ-साथ कर्नाटक विधानसभा की तस्वीरें अंकित की गई हैं। इसके अलावा कोच में स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्वचालित सेंसर आधारित डस्टबिन लगाए गए हैं। इन डस्टबिनों को हाथ से छूने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सेंसर के सामने हाथ लाते ही ढक्कन खुल जाता है और कचरा डालने के बाद खुद बंद हो जाता है।
उद्घाटन के दिन यह ट्रेन बेंगलुरु से चलकर अपने पहले ठहराव हिंदूपुर पहुंची। बेंगलुरु से हिंदूपुर तक की इस यात्रा में लगभग डेढ़ घंटे का समय लगा। नियमित सेवा में यह ट्रेन रात के समय चलेगी, लेकिन उद्घाटन यात्रा दिन में होने से यात्रियों को रास्ते में पड़ने वाली पहाड़ियों और परिदृश्यों का सुंदर नजारा देखने को मिला। बड़ी खिड़कियों के जरिए बाहर का दृश्य बेहद आकर्षक नजर आता है।
उद्घाटन यात्रा में ट्रेन का संचालन महिला लोको पायलट कुमारी पल्लवी ने किया। दक्षिण पश्चिम रेलवे के बेंगलुरु मंडल की सीनियर सहायक लोको पायलट कुमारी पल्लवी ने बताया कि अन्य ट्रेनों के रैक की तुलना में इस स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस में ड्राइविंग और राइडिंग बेहद स्मूथ है। उन्होंने बताया कि ट्रेन जब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति पर चल रही थी, तब भी भीतर बैठे यात्रियों को रफ्तार का अहसास नहीं हो रहा था। उन्होंने पहले दिन इस आधुनिक ट्रेन को चलाने के अवसर को अपने जीवन और अपने परिवार के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण बताया।



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